मनसंगी राष्ट्र प्रेम पत्रिका का द्वितीय अंक का हुआ सफल प्रकाशन हमारे संविधान प्रणेता पत्रिका का हुआ अंबेडकर जानती पर प्रकाशन देश के कई शहरों से रचना करो को मिला मौका

RAKESH SONI

मनसंगी राष्ट्र प्रेम पत्रिका का द्वितीय अंक का हुआ सफल प्रकाशन

हमारे संविधान प्रणेता पत्रिका का हुआ अंबेडकर जानती पर प्रकाशन

देश के कई शहरों से रचना करो को मिला मौका

सारनी। मनसंगी साहित्य संगम की ओर से अंबेडकर जंयती के अवसर पर “राष्ट्र प्रेम पत्रिका का द्वितीय अंक -हमारे संविधान प्रणेता” का सफल प्रकाशन किया गया, जिसका संपादन कार्य आ. रविशंकर निषाद जी (रायगढ़, छ. ग.) व संकलन कार्य आ. जागृति शर्मा(बिलासपुर छ.ग.) ने किया। मनसंगी परिवार की ओर से संस्थापक आ. अमन राठौर “मन”जी(सारनी) और सहसंस्थापिका मनीषा कौशल जी(भोपाल) जी के सानिध्य में, आ. सत्यम द्विवेदी जी(कानपुर) की अध्यक्षता में समाज को,बाबा साहेब जी को समर्पित इस पत्रिका बहुत ही सुन्दर प्रस्तुतिकरण हुआ। पत्रिका का प्रकाशन मनसंगी की अपनी ही साइड पर व चलचित्र के माध्यम से यूट्यूब पर प्रकाशन हुआ। हमेसा की तरह एक बार भी खास बात ये रही कि यहाँ नौसिखिया कलाकार आते है और बड़ी ही सहजता से साहित्यिक गतिविधियों को सीखते है। इसी क्रम में यह पत्रिका भी रही जिसमें सरस्वती वंदना से शुरुआत श्री सत्यम द्विवेदी(कानपुर) जी ने की। पत्रिका को सफल बनाने में रचनाकार पूजा नीमा, गौतम केसरी, विनीत श्रीवास्तव, वेद प्रकाश दिवाकर, विनोद ढींगरा,*राजन*,नीलोफ़र फ़ारूक़ी तौसीफ़, निशा”अतुल्य”,पीयूष राजा,सुरंजना पांडेय, अनामिका संजय अग्रवाल, प्रीति सक्सेना, सौ,भावना विधानी, डां. संजू त्रिपाठी, सुनीता कुमारी अहरी, रामकुमारी, नंदिनी लहेजा, प्रज्ञा आम्बेरकर ने अपनी रचना देकर योगदान दिया। पत्रिका के बारे में संकलक जागृति शर्मा ने बताया कि राष्ट्र प्रेम पत्रिका का ये अंक डां. भीमराव अंबेडकर के जीवन की घटनाओं पर आधारित पत्रिका हैं। जिससे समाज और पाठक उनके बारे में जान सके और उनके आदर्शों और जीवनमूल्यों को जीवन में अपनाकर अपने जीवन में बदलाव ला सके।साथ ही संस्थापक अमन राठौर मन जी ने इस पत्रिका के पीछे के मूलभूत उद्देश्यों को भी बताया। मन जी ने कहा कि बाबा साहेब आज के जनजीवन के जीवंत प्रणेता है। यह सब दिखता भी है। जीवन मे सदैव सीखना व जिज्ञासु रहना हर मंजिल को पाने में आसान बनाता है।

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