मनसंगी प्रकाशन ने प्रथम बार अपना संकलन गरीबों के हित में काम करने वाली संस्था भोजन बैंक को समर्पित किया।
सारणी। मनसंगी साहित्य संगम के तत्वधान में संकलन प्रकाशित किया गया जिसका विषय गरीबों के हित में कार्य करने वाली संस्था को ध्यान में रखकर किया गया और इस संकलन के माध्यम से समाज को अपने आसपास के गरीब परिवार को भूंखा ना सोना पड़े इस मुहिम पर कार्य करने के लिए जाग्रत करते है। समाज में ऐसी कई संस्थाएं है जो अपने अपने जिले राज्य शहर गांव में अपना हर संभव प्रयास करते है की कोई गरीब भूखा न सोए। उसी में एक संस्था भोजन बैंक सेवा समिति जिसके संस्थापक युवा भाई विकास मिश्रा है जो की दिन रात और कोरोना काल में जहां लोग बाहर निकलना पसंद नहीं करते है उस समय भी इस संस्था ने एक मिनिट का भी विश्राम नही किया दिन रात भोजन के पैकेट बनाकर वितरित करती रही और महामारी से ग्रसित परिवार वालो के घर पर भोजन पहुंचाने का काम किया है। इनके मुहिम को एक ताकत मिले और उत्साहवर्धन हो इसलिए मनसंगी प्रकाशन ने ये संकलन जिसका शीर्षक गरीबी (सहसा गर्त की ओर) प्रकाशित किया और कई कवियों से उनकी भावपूर्ण रचना ली।
मनसंगी साहित्य संगम जिसके संस्थापक अमन राठौर मन है सह संस्थापिका मनीषा कौशल जी तथा अध्यक्ष सत्यम द्विवेदी है और जिस प्रकार भोजन बैंक सेवा समिति गरीबों के हित में निशुल्क कार्य करती है उसी प्रकार मनसंगी साहित्य संगम भी साहित्य को बढ़ावा देने के लिए निशुल्क कार्य करता है एक परिवार की तरह कई सदस्य इसमें जुड़े है जो अपने अपने कार्य करते रहते है।
इसमें विभिन्न रचनाकारों ने भाग लिया
आंचल त्रिपाठी अयोध्या से विश्वदीप शुक्ला लखनऊ से, किरण मिश्रा कानपुर, राजेंद्र सिंह जी, मनोज कुमार, रामकुमारी गंगा जी, सुरंजना पांडेय जी, गुरुदयाल झरिया, हरिबख्स यादव, अनुराधा के मंगलूरू,राधा दुबे, सरला सिंह, अकाशवीर , चंचलिका ,रचना सिंह ,पूर्णिमा कबडवाल, शेखर कुमार रंजन, कंचन झा ,लता सिंघई,अमरनाथ सोनी, रवि कुमार, प्रियंवदा पांडे ,गोविंद आनंद ,असीम आनंद ,गीता शर्मा ,संजू त्रिपाठी, सुहानी मेहता ,ज्योति एन भावनानी ,मंगल कुमार जैन ,पाखी जैन ,सोनल मंजूश्री ओमर, अनामिका संजय अग्रवाल ,ज्ञानेश्वरी व्यास ,जया कुमारी ,राम जी त्रिवेदी ,निधि बोथरा जैन, रंजन झा, भावना गौतम, अर्चित जैन ,प्रियंका लालवानी खत्री ,वेद प्रकाश दिवाकर।