अबोध बालिका के साथ दुष्कर्म करने वाले आरोपी बुजुर्ग को शेष प्राकृत जीवन काल के लिए आजीवन कारावास की सजा
मुलताई। चार वर्षीय अबोध बालिका के साथ दुष्कर्म करने वाले 70 वर्षीय आरोपी बुजुर्ग को प्रथम अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश ने दोषी ठहराते हुए शेष प्राकृत जीवनकाल के लिए आजीवन कारावास की सजा से दंडित किया है। प्रकरण में शासन की ओर से पैरवी करने वाली विशेष लोक अभियोजक मालिनी देशराज ने बताया पीड़िता की मां ने पुलिस थाने में सूचना देते हुए बताया था कि बीते 8 मई 2022 को शाम 7 बजे के दरमियान उसकी 4 वर्षीय पुत्री घर के सामने आंगन में खेल रही थी। और वह घर की छत पर पौधों में पानी डालने गई थी । उसी दौरान पुत्री की चिल्लाने की आवाज आई तो वह पुत्री को खोजते हुए घर के सामने रहने वाले तेजीलाल फरकाड़े के मकान पर पहुंची। जहा तेजीलाल उसकी पुत्री के साथ दुष्कर्म कर रहा था। पीड़िता की मां ने तेजी लाल के चंगुल से अपनी पुत्री को छुड़ाया और घर लेकर आई । और पुत्री को लेकर पुलिस थाना पहुंचकर आरोपी तेजीलाल पिता रामजी फरकाड़े के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई। पुलिस ने पीड़िता की मां की रिपोर्ट पर आरोपी तेजी लाल के खिलाफ धारा 376 (1)9(एम) 10 लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम के तहत केस दर्ज कर आरोपी तेजीलाल को गिरफ्तार किया। थाने में पदस्थ उपनिरीक्षक अश्विनी चौधरी ने पीड़िता का मेडिकल परीक्षण कर प्रकरण की विवेचना करने के उपरांत प्रकरण न्यायालय में प्रस्तुत किया। प्रथम अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश ने प्रकरण की सुनवाई उपरांत आरोपी तेजीलाल को धारा 376ए बी भादवि और धारा5 (एम) सहपठित धारा 6 पॉक्सो एक्ट के आरोप में दोषी पाया। न्यायाधीश ने आरोपी तेजीलाल को धारा 5 ,(एम) सहपठित धारा 6 पाक्सो एक्ट के तहत शेष प्राकृत जीवन के लिए आजीवन कारावास और 2 हजार रूपए के अर्थदंड से दंडित किया है।