भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ताओं ने समर्पण दिवस के रूप में मनाई पंडित दीनदयाल उपाध्याय की पुण्यतिथि
अंतिम पंक्ति पर खड़े व्यक्ति के विकास की परिकल्पना एकात्म मानववाद के प्रणेता थे पंडित दीनदयाल उपाध्याय:-सुधाकर पवार
नगर मंडल के 67 बुथो पर मनाई गई पंडित दीनदयाल उपाध्याय जी की पुण्यतिथि

सारनी । भारतीय जनता पार्टी मंडल अध्यक्ष नाग्रेन्द्र निगम के नेतृत्व में 11 फरवरी भारतीय जनसंघ के संस्थापक सदस्य, अंत्योदय एवं एकात्म मानववाद दर्शन के प्रणेता पंडित दीनदयाल उपाध्याय जी की पुण्यतिथि भारतीय जनता पार्टी नगर मंडल द्वारा मंडल के 67 बुथो पर मनाई गई।

प्रेस नोट जारी कर भारतीय जनता पार्टी के मंडल महामंत्री प्रकाश शिवहरे ने बताया की भारतीय जनता पार्टी के जिला महामंत्री व सरनी मंडल के प्रभारी सुधाकर पवार, झुग्गी झोपड़ी प्रकोष्ठ के प्रदेश संयोजक रंजीत सिंह ,नपा अध्यक्ष किशोर बरदे,सांस्कृतिक प्रकोष्ठ के जिला संयोजक सुधा चन्द्रा,पंजाबराव बारस्कर रविन्द्र पान्से व अन्य वरिष्ठ नेताओं के आतिथ्य में सारनी नगर के सभी 67 बुथो पर पंडित दीनदयाल उपाध्याय की पुण्यतिथि मनाई गई। इस अवसर पर नगर मंडल के वॉड 35 ,30,24,25,12 के बुथ क्र.91,80,69,68,52 पर भारतीय जनता पार्टी के जिला

महामंत्री सुधाकर पवार द्वारा प्रवास कर पुण्यतिथि के कार्यक्रम में शामिल हुए।और कहाँ की भारतीय जनसंघ के संस्थापक सदस्य,अंत्योदय एवं एकात्म मानववाद दर्शन के प्रणेता थे पंडित दीनदयाल उपाध्याय जी ने अपने जीवन में लंबा संघर्ष कर पूरा जीवन राष्ट्र को समर्पित किया। आपके समर्पण को देखकर भारतीय जनता पार्टी द्वारा आज के दिवस को समर्पण दिवस के रूप में सभी बूथों पर मनाया जाता है। वार्ड क्र.12 में भारतीय जनता पार्टी के मंडल अध्यक्ष नागेन्द्र निगम ने कहा कि समर्पण दिवस का कार्यक्रम नगर मंडल के सभी बूथों पर किया जा रहा है प्रति वर्ष अनुसार इस वर्ष भी भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ता पार्टी के समर्पण कार्य में लगे है। वार्ड क्र.25 में झुग्गी झोपड़ी प्रकोष्ठ के प्रदेश संयोजक रंजीत सिह ने कहाँ के भारतीय जनसंघ की स्थापना डॉ.श्यामा प्रसाद मुखर्जी द्वारा वर्ष 1951 में किया गया एवं दीनदयाल उपाध्याय को प्रथम महासचिव नियुक्त किया गया वे लगातार दिसंबर 1967 तक जनसंघ के महासचिव बने रहे. उनकी कार्यक्षमता, खुफिया गतिधियों और परिपूर्णता के गुणों से प्रभावित होकर डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी उनके लिए गर्व से सम्मानपूर्वक कहते थे कि- ‘यदि मेरे पास दो दीनदयाल हों, तो मैं भारत का राजनीतिक चेहरा बदल सकता हूं’. परंतु अचानक वर्ष 1953 में डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के असमय निधन से पूरे संगठन की जिम्मेदारी दीनदयाल उपाध्याय के युवा कंधों पर आ गयी. इस प्रकार उन्होंने लगभग 15 वर्षों तक महासचिव के रूप में जनसंघ की सेवा की. भारतीय जनसंघ के 14वें वार्षिक अधिवेशन में दीनदयाल उपाध्याय को दिसंबर 1967 में कालीकट में जनसंघ का अध्यक्ष निर्वाचित किया गया. वही नगर पालिका अध्यक्ष किशोर बरदे द्वारा पंडित दीनदयाल उपाध्याय जी को याद करते हुए कहा कि उपाध्याय जी एक राजनेता,समाजसेवी के साथ- साथ साहित्यकार भी थे उनकी प्रसिद्ध साहित्यिक कृतियों में ‘सम्राट चंद्रगुप्त’, ‘जगतगुरू शंकराचार्य’, ‘अखंड भारत क्यों हैं’, ‘राष्ट्र जीवन की समस्याएं’, ‘राष्ट्र चिंतन’ और ‘राष्ट्र जीवन की दिशा’ आदि हैं. भारतीय जनता पार्टी की केंद्र और राज्य सरकार के साथ नगरी सरकार भी पंडित दीनदयाल उपाध्याय के एकात्म मानववाद के दर्शन को आत्मसात् करने के लिए। अंतिम पंक्ति पर खड़े व्यक्ति को शासन की योजनाओं का लाभ मिले कोई भी जरूरतमंद व्यक्ति शासन की योजनाओं से वंचित ना हो इससे से कार्य कर रही है
भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ताओं द्वारा बुथो पर समर्पण राशि कार्यकर्ताओं से संकलित की नगर मंडल के सभी बूथों पर पंडित दीनदयाल उपाध्याय जी की पुण्यतिथि भारतीय जनता पार्टी के बुथ अध्यक्ष,महामंत्री बीएलए,(त्रिदेव)पार्षद गण,मंडल पदाधिकारी शक्ति केंद्र के संयोजक व प्रभारी मोर्चा प्रकोष्ठ के पदाधिकारियों व जेस्ट श्रेष्ठ कार्यकर्ताओं द्वारा मनाई गई।