अंबेडकरी जनसेवा संगठन ने स्वतंत्रता संग्राम सेनानी बिरसा मुंडा की पुण्य तिथि मनाई
सारणी। अंबेडकरी जनसेवा संगठन द्वारा स्वतंत्रता संग्राम सेनानी बिरसा मुंडा की पुण्यतिथि सारनी स्थित कार्यालय में मनाई गई। संगठन के सभी कार्यकर्ताओं द्वारा बिरसा मुंडा की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया गया। तत्पश्चात संगठन के कोषाध्यक्ष भरत खंडाग्रे द्वारा बिरसा मुंडा की भारत में स्वतंत्रता प्राप्ति में उनके योगदान से परिचित करवाया। उन्होंने बताया कि बिरसा मुंडा एक आदिवासी समुदाय में जन्मे महान व्यक्तित्व के धनी व्यक्ति थे। जल, जंगल, जमीन का नारा देने वाले बिरसा मुंडा का लगाओ अपने देश के प्रति इतना था कि अपने देश को आजाद कराने के लिए वे अल्प आयु में ही स्वतंत्रता संग्राम में कूद पड़े थे। वें मुंडा समुदाय का प्रतिनिधित्व भी करते थे। मुंडा समुदाय में जागृति का प्रमुख कारण बिरसा मुंडा को ही बताया जाता है। उन्होंने सबसे पहले मात्र अल्प आयु 25 वर्ष में ही अंग्रेजों को लोहे के चने चबा दिए थे। बिरसा का आजादी में अमूल्य योगदान रहा है बिरसा ना होते तो आदिवासी समुदाय आज भी अंधविश्वास में पढ़ा होता। उन्होंने अपने समुदाय को अंधविश्वास से निकालने हेतु भरसक प्रयास किया। अंग्रेजों की कूटनीति हमारे एक हाथ में बाइबल है और तुम्हारे एक हाथ में जमीन हैं। किंतु कुछ समय पश्चात आदिवासियों के हाथ में बाइबल और अंग्रेजों के हाथ में जमीन हुआ करती थी। इसका विरोध करके अपने समुदाय को ठगी का शिकार होने से बचाया। बिरसा मुंडा का जन्म सन् 1875 में झारखंड के एक छोटे से गांव में हुआ था। बिरसा का बचपन से ही देश के प्रति लगाओ, यहीं कारण था कि बिरसा अल्प आयु में ही स्वतंत्रता संग्राम में कूद पड़े। 25 वर्ष की आयु में ही उनके प्राण अंग्रेजों द्वारा धीमा जहर देकर छीन लिए। उनकी मृत्यु 9 जून 1900 को कारागार में हों गई। किंतु उन्होंने अंग्रेजों के समक्ष अपने घुटने नहीं टेके। बिरसा ने कभी भी अपने प्राणों की रक्षा के लिए अपने स्वाभिमान से समझौता नहीं किया। इसलिए उन्हे धरती आबा के नाम से भी जाना जाता हैं। उनका मानना था कि दुनिया मुझे कम से कम गद्दार तो नहीं बोलेगी। उन्होंने किसी भी कीमत पर अंग्रेजो के तलवे नहीं चाटे। वह एक ऐसे व्यक्ति थे जिन्होंने अपने परिवार से पहले अपने देश को अमूल्य समझा।इसलिए आज पूरा देश उनके अमूल्य योगदान को भुला नहीं पाया हैं। इसी के साथ संगठन के अन्य पदाधिकारियों ने बिरसा मुंडा की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर उन्हें याद किया और उनके जीवन शैली के कम से कम एक भाग को अपनाने की प्रतिज्ञा ली। कार्यक्रम में प्रदेश कोषाध्यक्ष भरत खंडाग्रे, अमर अतुलकर, मनीष झरबड़े,आशीष चौकीकर, दीपक खातरकर, शिवम नागले, सोनू बामने, नंदकिशोर सरिया, रविकांत विक्रमपुर आदि लोग उपस्थित थे।