आंवला नवमी हर्षोउल्लास से मनाई
आंवले के वृक्ष में होता है देवी-देवताओं का वास।

बैतूल। शास्त्रों में वर्णन आता है कि कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की आंवला नवमी पर आंवले के वृक्ष का पूजन और उसके समीप किया गया जप-ध्यान-सत्कर्म और भोजन का पुण्यफल अक्षय हो जाता है। इसे ध्यान रखते हुए टैगोर वार्ड की महिलाओं द्वारा समाजसेवी राजेश मदान के निवास के सामने लगे आंवले के वृक्ष का हल्दी, कुमकुम, चांवल से तिलक और घी के दीपक व कपूर से आरती के बाद ओम धात्रेय नम ओम नमो भगवते वासुदेवाय जैसे वैदिक सिद्धिदायी मंत्रों से पूजन करके आँवले के वृक्ष की यानि कानि च पापानि जन्मांतर कृतानि च। तानि सवार्णि नश्यन्तु प्रदक्षिणे पदे-पदे। मंत्र बोलकर नौ परिक्रमा की गई तत्पश्चात आँवले के वृक्ष के नीचे बैठकर जप, ध्यान और भोजन करने का विशेष पुण्यदाई सत्कर्म किया गया। श्री योग वेदांत सेवा समिति बैतूल के संरक्षक राजेश मदान ने आँवले की महिमा बताते हुए कहा कि आँवले का वृक्ष साक्षात विष्णु जी का स्वरूप है इस वृक्ष में समस्त देवी देवताओं का वास होता है आंवला नवमी पर इसके दर्शन, स्पर्श और पूजन से सैकड़ों गोदान का फल प्राप्त होता है आंवले को पृथ्वी का अमृतफल भी कहा जाता है। पंडित उमाकांत द्विवेदी द्वारा सभी से विधिवत पूजन करवाया गया। इस अवसर पर वार्ड की श्रीमती लीलावंती बतरा, श्रीमती प्रीति अग्रवाल, श्रीमती अर्चना अग्रवाल, श्रीमती नेहा मित्तल, श्रीमती गीता मदान, श्रीमती अनु मदान, श्रीमती विद्या टंडन, श्रीमती भूमि बतरा, श्रीमती सोनम टुटेजा, सुजल टुटेजा, भव्या मदान, राजेश मदान एवं मोहन मदान सहित वार्डवासी मौजूद थे।
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