आदिम कल्चरल एंड वेलफेयर सोसाइटी के माध्यम से सुखिया मर गया भूख से नाटक का मंचन किया गया।
घोड़ाडोंगरी। आदिम कल्चरल एंड वेलफेयर सोसाइटी के माध्यम से नाटक सुखिया मर गया भूख से जिसके लेखक राजेश कुमार , निर्देशक राकेश वरवड़े और कलीम जफर ने अग्रेशन भवन घोड़ाडोंगरी जिला बैतूल मध्य प्रदेश में प्रस्तुत किया गया।
इस नाट्य मंच पर आदर्श मिश्रा, आयुष सिंह, विशाल गुप्ता, गगन राज, अनमोल नागले ,महेंद्र नागले, कलीम जाफर ,राकेश वरवड़े, राजकरण भलावी , हरदित्य, मीनाक्षी सरयाम, राधिका शर्मा, राशि शर्मा, अमन पाखरे, साहिल कहार ,सागर, करण , पंकज ,विशाल बारवे, हर्षल,पीयूष धनगर और जिया कहार ने बहुत ही प्रभावी तरीके से अभिनय कर सभी दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
अभिनय की शैली बहुत ही प्रभावी और सारगर्भित करने वाली है।
इस नाटक को सफल बनाने हेतु मंच के परे रहकर सहयोग किया भारतीय नागले ,भावना नागले, महेंद्र, प्रवीण नामदेव ,नितेश वरवड़े,अमोल नागले,आदर्श मिश्रा ,आयुष सिंह, विशाल गुप्ता, सचिन खातरकर, जय खातरकर, राजकुमार साहू और विशेष आभार श्री आशीष अग्रवाल, श्री संतोष जैन ,श्री बलदेव , डॉक्टर मनोज वरवड़े, श्रीमती नमिता अतुलकर ,बलवीर रजक ,रुक्कु भैया और रितु रंगशाला आर्ट एंड कल्चर गोटेगांव नरसिंहपुर का जिन्होंने सहयोग किया।
इस नॉट अभिनय को देखने हेतु नगर वरिष्ठजन ,समाजसेवी, बुद्धिजीवी, महिलाएं, युवा और बालक बालिकाओं ने बारीकियों को देखा और नाटक की बहुत प्रशंसा की सभी कलाकारों ने अपना 100% अभिनय किया।
नाटक के निदेशक राकेश वरवड़े और कलीम जफर ने बताया लगभग 1 महीने से सभी कलाकारों को प्रशिक्षण निशुल्क दिया गया । गोरखपुर ,बैतूल और घोड़ाडोंगरी के कलाकारों ने अभिनय की बारीकियां को सीखा और इस सफल नाट्य कार्यक्रम ”सुखिया मर गया भूख से” को प्रस्तुत किया और सभी सहयोगियों का दिल से आभार व्यक्त किया ।
कार्यक्रम देखने पहुंचे दर्शकों ने खूब तालिया बजाकर, सभी कलाकारों का उत्साह वर्धन किया।
कार्यक्रम देखने पहुंचे दर्शक हेमंत साहू ने बताया कि नाटक में बहुत ही उच्च प्रदर्शन किया गया। नाटक के लेखक राजेश कुमार द्वारा बहुत ही रोचक और व्यंग्यात्मक तरीके से लिखा गया और निर्देशनकार्य राकेश बरबड़े और कलीम जफर द्वारा कुशल मार्गदर्शन में उच्च श्रेणी का प्रदर्शन सभी नौसिखिया कलाकारों ने किया।
नाटक सुखिया मर गया भूख से उन किसानों की आवाज है जो कर्ज़ से तंग आकर आत्महत्या कर लेते हैं और भूख से मर जाते हैं ।अन्नदाता का भूख से मरना विकसित समाज के लिए एक बड़ा प्रश्न चिन्ह है ।यह एक व्यंग्य नाटक है जो की सुखिया के मरने के बाद शुरू होता है। जो कि भूख से मर चुका है और वह यमराज के आने का इंतजार कर रहा है ताकि उसकी आत्मा को यमराज ले जा सके भूख से मरने पर पूरे प्रदेश में हड़कंप मच जाता है कि एक किसान कैसे भूख से मर गया और प्रशासन सुखिया की मौत को झूठलाने के लिए कैसे-कैसे हथकंडे अपनाते हैं। उसे हास्य और व्यंग के माध्यम से बताया गया है इस नाटक के अंत में यमराज सुखीया की आत्मा लेने आता है पर वह और उसके जैसे आत्मा यमराज के साथ जाने पर यह कहकर विद्रोह कर देते हैं कि जब तक वह भूख से मुक्त नहीं हो जाते तब तक वह वापिस नहीं जाएंगे।