हम जहां होते हैं, मन से वहां होते नहीं हैं और इसी कारण दुर्घटनाएं होती हैं – पूज्य श्री प्रेमभूषण जी महाराज

RAKESH SONI

हम जहां होते हैं, मन से वहां होते नहीं हैं और इसी कारण दुर्घटनाएं होती हैं – पूज्य श्री प्रेमभूषण जी महाराज

सारणी। आज का मनुष्य बहुत ही व्यस्त हो गया है और खास करके जब से मोबाइल का आगमन हुआ है मनुष्य शरीर से जहां होता है । वह अपने मन से वहां नहीं रहता है। और अक्सर इसी कारण से ही दुर्घटनाएं होती हैं। मैं अब तक सड़क मार्ग से 1300000 किलोमीटर से भी अधिक की यात्रा कर चुका हूं लेकिन ठाकुर जी गवाह है कि हमारे साथ ऐसी कोई घटना नहीं हुई।

उक्त बातें अंतर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त कथावाचक प्रेममूर्ति पूज्य श्री प्रेमभूषण जी महाराज ने यहां चल रही नौ दिवसीय कथा यात्रा के तृतीय दिवस की कथा के क्रम में कहीं।

सारणी में चल रहे नौ दिवसीय श्रीरामकथा के आज तीसरे दिन की कथा में प्रेमभूषण जी महाराज ने सज्जनता और दुर्जनता की व्याख्या करते हुए कहा कि किसी भी गलत कार्य का विरोध होना जरूरी है,चाहे वह घर हो या बाहर,गलत व्यक्ति को गलत होने का एहसास होना जरूरी है। अति की सज्जनता और सज्जन व्यक्तियों की निष्क्रियता ही दुर्जनों को आश्रय देती है।

महाराज जी ने कहा कि प्रत्येक घर में तुलसी का पौधा अवश्य होना चाहिए, यह नकारात्मक शक्तियों का हरण कर सकारात्मक शक्तियों का प्रवाह करती हैं। उन्होंने कहा कि सनातन धर्म में प्रत्येक विधि विधान का कारण है, सनातन धर्म में कुछ भी अकारण नहीं होता।

श्री राम जन्मोत्सव से जुड़े प्रसंगों की चर्चा करते हुए महाराज श्री ने कहा कि महाराजा श्री रामचंद्र जी की कई पीढ़ियां गोवंश की सेवा के लिए चर्चित रहीं और खासकर महाराजा दिलीप तो इस मामले में एक उदाहरण के रूप में इतिहास में याद किए गए। उन्होंने कहा कि हमारा इतिहास इस बात का प्रमाण है कि जो भी व्यक्ति गौ संरक्षण के लिए कार्य करता है, उसका विरोध करना करने वाले अपने आप समाप्त हो जाते हैं। उन्होंने कहा कि मानस की यह पंक्तियां इस बात की प्रमाण हैं – विप्र धेनु सुर संत हित, लीन्ह मनुज अवतार। अर्थात भगवान का धरा पर आगमन भी इन्ही कारणों से होता है।

महाराज श्री ने कई सुमधुर भजनों से श्रोताओं को भावविभोर कर दिया। हजारों की संख्या में उपस्थित रामकथा के प्रेमी भजनों का आनन्द लेते हुए झूमते नजर आए।

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