बिजली उधोग के निजीकरण हेतु संसद में रखे जा रहे इलेक्ट्रीसिटी (अमेण्डमेंट) बिल 2022 का विरोध करेंगे:- यूनाइटेड फोरम।

RAKESH SONI

बिजली उधोग के निजीकरण हेतु संसद में रखे जा रहे इलेक्ट्रीसिटी (अमेण्डमेंट) बिल 2022 का विरोध करेंगे:- यूनाइटेड फोरम।

सारणी:- मध्यप्रदेश यूनाइटेड फोरम फार एप्लाइज एंड इंजीनियर्स के संयोजक वी के एस परिहार ने बताया कि केंद्रीय विद्युत मंत्री आर के सिंह द्वारा इलेक्ट्रिसिटी (अमेंडमेंट) बिल 2022 को 8 अगस्त को संसद में रखने और पारित कराए जाने की  घोषणा के बाद ऑल इंडिया पावर इंजीनियर्स फेडरेशन ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को पत्र भेजकर बिजली उधोग के निजीकरण को रोकने की मांग की है ,जिससे जल्दबाजी में इस बिल को संसद में न पारित कराया जाए और बिजली उपभोक्ताओं तथा बिजली कर्मचारियों सहित सभी स्टेकहोल्डर्स  से विस्तृत चर्चा करने हेतु इस बिल को संसद की बिजली मामलों की स्टैंडिंग कमेटी को भेजा जाए। मध्यप्रदेश यूनाइटेड फोरम सारनी के प्रचार सचिव अंबादास सूने ने बताया कि ऑल इंडिया पावर इंजीनियर्स फेडरेशन के चेयरमैन शैलेन्द्र दुबे ने प्रधानमंत्री को प्रेषित पत्र में लिखा है कि इलेक्ट्रीसिटी (अमेंडमेंट) बिल 2022 पर केंद्रीय विद्युत मंत्री के 02 अगस्त को हस्ताक्षर करने से स्पष्ट है कि इस बिल पर किसी भी राज्य सरकार अथवा किसी भी स्टेकहोल्डर्स से न ही कोई बात की गई है और न ही किसी से कोई कमेंट मांगे गये है। बिजली संविधान की समवर्ती सूची पर है जिसका अर्थ है कि इस मामले में केंद्र सरकार और राज्य सरकार को बराबर का अधिकार है। 02 अगस्त को केंद्रीय विद्युत मंत्री के हस्ताक्षर वाला बिल का प्रारूप 05 अगस्त को जारी किया गया है और लोकसभा में 08 अगस्त को रखा जा रहा है। फेडरेशन ने प्रधानमंत्री से अपील की है कि बिल को जल्दबाजी में पारित नहीं किया जाये और इसे लोकसभा की बिजली मामलों की स्टैंडिंग कमेटी को भेजा जाये जिससे सभी स्टेकहोल्डर्स के विचार लिये जा सकें।नेशनल कोऑर्डिनेशन कमेटी ऑफ़ इलेक्ट्रिसिटी इम्प्लॉईज़ एन्ड इंजीनियर्स तथा ऑल इंडिया पावर इंजीनियर्स फेडरेशन ने केंद्रीय विद्युत् मंत्रालय को पहले ही नोटिस दिया है कि जिस दिन इलेक्ट्रिसिटी (अमेंडमेंट) बिल 2022 संसद में रखा जायेगा उसी दिन(08अगस्त को) देश के बिजली कर्मचारी व इंजीनियर  उसी समय काम बंद कर पूरे दिन व्यापक विरोध प्रदर्शन करेंगे । यूनाइटेड फोरम के सारनी एरिया के प्रचार सचिव अंबादास सूने ने बताया कि ऑल इंडिया पावर इंजीनियर्स फेडरेशन के चेयरमैन शैलेंद्र दुबे ने प्रधानमंत्री को प्रेषित पत्र में लिखा है कि इस मामले में एनर्जी वाचडॉग के  मुकदमे में 11 अप्रैल 2017 को माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा दिए गए निर्णय का पालन किया जाए । माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने  अपने फैसले में स्पष्ट कहा है कि  इलेक्ट्रिसिटी एक्ट 2003 बनाते समय सभी स्टेकहोल्डर्स से और विशेषज्ञों से इलेक्ट्रिसिटी बिल 2001 पर दो  वर्ष तक विस्तृत विचार-विमर्श किया गया था तब इलेक्ट्रिसिटी एक्ट 2003 बनाया गया।फेडरेशन ने अपने पत्र में कहा है कि माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा दिया गया निर्णय महत्वपूर्ण है ,और इलेक्ट्रिसिटी (अमेंडमेंट) बिल 2022 को अंतिम रूप देने के पहले सभी स्टेकहोल्डर्स विशेष तौर से  बिजली के उपभोक्ताओं और बिजली इंजीनियरों व कर्मचारियों  से विचार-विमर्श किया जाना आवश्यक है । माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने  अपने निर्णय में विचार विमर्श और सलाह देने को विशेष महत्व दिया है जबकि इलेक्ट्रिसिटी (अमेंडमेंट) बिल 2022 को संसद में रखने के पहले बिजली के उपभोक्ताओं और बिजली इंजीनियरों  व कर्मचारियों  से एक बार भी विचार-विमर्श नहीं किया गया है |ऑल इंडिया पावर इंजीनियर्स  फेडरेशन ने अपने पत्र में आगे लिखा है कि बिजली संविधान की समवर्ती सूची पर है और बिजली में कानून बनाने हेतु राज्य और केंद्र को बराबर का अधिकार है। ऐसे में इलेक्ट्रिसिटी (अमेंडमेंट) बिल 2022 को संसद में रखने के पहले सभी से  विस्तृत चर्चा किया जाना बहुत जरूरी है।फेडरेशन ने कहा कि इलेक्ट्रिसिटी एक्ट 2003 के स्थान पर  बिजली के मामले में नया एक्ट बनाया जा रहा है ऐसे में जरूरी है कि  इलेक्ट्रिसिटी एक्ट 2003 बनाते समय जिस प्रक्रिया का पालन किया गया था उसका पालन नया एक्ट बनाने में किया जाए । छाया चित्र में फोरम के प्रांतीय संयोजक वी के एस परिहार के साथ अधिकारी ओर कर्मचारी विरोध करते हुए।

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